दमा (अस्थमा) रोग का आयुर्वेदिक उपचार : श्वास रोग का घरेलू उपचार

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दमा (अस्थमा) रोग तेजी से स्त्री-पुरुष और बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। सड़कों पर चलते वाहनों का धुआं और घरों के आस-पास फैक्ट्रियों की भिन परकार की गैसें और धुआं   जब वयक्ति के शरीर में पहुंचती हैं तो फेफड़ों Lungs को सबसे अधिक हानि पहुंचती है। प्रदूषित वातावरण Polluted environment में अधिक रहने से सांस की बीमारियाँ और दमा Asthma रोग होने का कारण बनती है। एक सर्वे के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों और शहरों की कुल जनसंख्या की 20 से 35 प्रतिशत आबादी Population इस रोग से पीड़ित है। शिशुओं में से प्रायः 45 प्रतिशत शिशु सांस संबंधी रोगों से पीड़ित होते हैं। इस रोग का असर मौसम परिवर्तन  weather change के समय और सर्दी के दिनों में अधिक प्रभावित करता है। कुछ रोगी ऐसे भी होते हैं, जो इस रोग से पूरा साल पीड़ित रहते हैं।  दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi

दमा रोग के कारण तथा लक्षण:-

  •  एलर्जी Allergies के कारण दमा रोग की अधिक उत्पत्ति होती है, जबकि कुछ किशोर  लड़के-लड़कियां वंशानुगत Hereditary दमा रोग से पीड़ित होते हैं। परिवार में माता या पिता में से किसी एक को दमा होने पर उनकी संतान को भी दमा हो सकता है।

 

  •  दमा रोगी जितना घबराता Nervousness है, दमे का दौरा उतना अधिक बढ़ता जाता है। कई बार तो रोगी बेहोश होकर गिर पड़ता है। दमा रोग में बहुत अधिक खांसी उठती है। लगातार खांसने से रोगी परेशान हो जाता है। देर तक खांसने Coughing पर थोड़ा-सा कफ(बलगम) निकलता है तो खांसी कुछ कम हो जाती  है। दमा रोग का दौरा रात के समय अधिक होने से रोगी की नींद खराब हो जाती है। घुटनों में सिर रखकर बैठने से रोगी को कुछ आराम मिलता है।  दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi

 

  • मानसून सीजन में दमा रोग का प्रकोप अधिक होता है। वर्षा ऋतु में हवा में अधिक नमी होने से वातावरण में उमस Humidity हो जाती है। ऐसे वातावरण में दमा रोग रोगी को सांस लेने में अधिक कठिनाई Difficulty होती है। ऐसे में रोगी पर दमे का दौरा पड़ सकता है। ऐसे में रोगी गहरी सांस नहीं ले पाता तो उसे घुटन Suffocation का अनुभव होता है।

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  • आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (एलोपैथी) में इस रोग के दो प्रकार माने जाते हैं |

 

  • 1 हृदयजन्य साँस के रोग (Cardiac Asthama)   2. एलर्जिक सांस के रोग (Allergic Asthama) हृदयजन्य सांस : इस रोग में हृदय  रोग का प्रभाव फेफड़ों पर होता है, जिससे सांस रोग होता है। इन रोगियों में थोड़ी सी मेहनत करने, अधिक समय तक सीधा बिस्तर  पर लेटने, सीढ़ियां चढ़ने तथा साइकिल चलाने आदि से सांस फूलने लगती है और रोगी को बहुत घबराहट होने लगती ह। सांस लेने  में इतनी अधिक कठिनाई होती है कि रोगी खुली साफ हवा की ओर जाने का प्रयास करता है। रोग पुराना होने पर रोगियों के जोड़ों  में  पानी एकत्र होने पर सूजन आ जाती है। दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi

 

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  •  यदि किसी चीज से एलर्जी के कारण दमा Asthma रोग का दौरा शुरू होता हो तो रोगी को उस ‘एलर्जिक वस्तु का पता लगाकर          उससे  अलग रहने की कोशिश करनी चाहिए। खाने-पीने की चीजों से भी एलर्जी Allergies हो सकती है। कुछ लोगो को फूल से तो    कुछ को पालतू पशु-पक्षियों से एलर्जी हो सकती है। धूल Dust उड़ने से भी एलर्जी का प्रकोप हो सकता है। एलर्जिक सांस रोग के        कुछ कारण ये भी होते है : एलर्जी पैदा करने वाले तत्व (जैसे– धूल, घास, फूल, पराग, पालतू पशु-पक्षियों की त्वचा से झड़ने वाली रूसी,  घर  की धूल Dust सांस की नली में मौजूद किसी जीवाणु Bacteriya  द्वारा एलर्जी हो सकती है, जिससे नाक और फेफड़ों Lungs के अंदर की झिल्लियों Membranes में सूजन आ जाती है और फिर तेज छींकें आना, नाक बंद होना, जुकाम या छाती में जकड़न,  खांसी  Sneezing, nose closure, cold or tightness in chest, cough और दमा के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। कभी-कभी  दूध, सब्जियां, गेहूं, अंडे, दाल, मांस आदि से निकले कोई प्रोटीन एलर्जिक जैसा कार्य करते हैं। दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi

 

दमा रोग के लिए आयुर्वेदिक गुणकारी नुस्खे

  • सोंठ, सेंधा नमक, जीरा, भुनी हुई हींग और तुलसी के पत्ते सभी चीजें बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। इसमें से 10 ग्राम मिश्रण को 300 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ(काहडा) बनाकर पिलाने से दमा रोग में बहुत लाभ होता है |
  • दमा रोगी को रोज दूध का सेवन करना चाहिए। दूध से अधिक कफ cough की समस्या को रोकने के लिए दूध को उबालते समय दो पिप्पली डाल लें। फिर उस दूध को छानकर मिसरी मिलाकर सेवन करें
  • अदरक Ginger के 5 ग्राम रस को शहद मिलाकर सेवन करें।
  • नींबू का रस 10 ग्राम, अदरक का रस 5 ग्राम मिलाकर गर्म पानी के साथ पीने से दमा रोग का प्रकोप कम होता है।
  • लहसुन Garlic का रस 10 ग्राम मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से दमा  रोगी का सांस की रुकावट कम होती है।
  • प्याज का रस, अदरक का रस, तुलसी के पत्तों का रस और शहद सभी 3-3 ग्राम मात्रा में लेकर चाट ने से दमा रोग आराम मिलता है।  दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi
  • जब सांस की तेजी में हींग और कपूर 2-2 रत्ती मिलाकर गोली बनाकर 2-2 घंटे के अंतर से सेवन करने से सांस गति सामान्य हो जाती है।
  • 60 ग्राम पिसा हुआ सुहागा 120 ग्राम शहद में मिलाकर रख लें। कुछ दिनों तक आधी चम्मच यह दवा सोते समय चाटने से दमा रोग ठीक होता है।
  • हल्दी को पीसकर, तवे पर भूनकर शीशी में बंद करके रखें। 5 ग्राम हल्दी हल्के गर्म पानी से रोजाना सेवन करने पर दमा रोग में बहुत लाभ होता है।

 

 

  • अधिक खांसने पर भी कफ नहीं निकलता हो तो छाती पर सरसों के 20 ग्राम तेल में 5 ग्राम सेंधा नमक अच्छी तरह मिलाकर मालिश करें।
  • दमा रोग में सांस अवरोध होने पर कॉफी पीने से बहुत शांति मिलती है। दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi
  • दो-तीन लौंग 150 ग्राम पानी में उबालकर थोड़ा-थोड़ा पानी पीने से दमा रोग-सांस की रुकावट दूर होती है|
  • अंजीर Fig के चार दाने रात को पानी में डालकर रखें। सुबह उन दानों को थोड़ा-सा मसलकर पानी पीने से दमा रोग में बहुत लाभ होता है। कब्ज Constipation भी नहीं रहती है।
  • खजूरDates के दो दाने गुठली निकालकर 3 ग्राम सोंठ Ginger dride के चूर्ण के साथ पान में रखकर सेवन करने से दमा रोग में सांस घुटने की समस्या से राहत मिलती है।
  • 20 ग्राम अकरकरा को 200 ग्राम पानी में उबालकर क्वाथ बनाकर 50 ग्राम शेष रहने पर शहद में मिलाकर सेवन कराने से दमा रोग लाभ होता है|
  • अनार Pomegranateके दानों को पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से दमा रोग ठीक होने में मदद मिलती है।
  • एक साल से अधिक उम्र वाले बच्चों के दमा रोग में रोजाना तुलसी Basilकी पाँच पत्तियाँ खूब बारीक पीसकर थोड़ी शहद के साथ सुबह शाम आवश्यकतानुसार तीन-चार सप्ताह तक चटाएँ। एक साल से कम उम्र वाले शिशु को तुलसी का रस दो बूंद (तुलसी की पत्तियाँ पीसकर साफ़ कपड़े से निचोड़कर निकाला गया तुलसी स्वरस) थोड़ी मात्रा शहद में मिलाकर दिन में दो बार चटाएँ। बच्चों के दमा के साथ-साथ उनके सांस Breath से जुड़े अनेक रोग जड़ से दूर होंगे।
  • दमबेल का एक पत्ता लेकर, उसमें एक काली मिर्च Black pepper डालकर पान की तरह खाली पेट चबा लें। इस तरह तीन दिन सेवन करने से दमा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग पूरा आराम मिल जाता है। तीन दिन में पूरा लाभ न मिलने की स्थिति में इस प्रयोग को एक सप्ताह तक भी किया जा सकता है।  दमा (अस्थमा)  का आयुर्वेदिक उपचार in hindi

 

 

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