जानिये केसी हो घर और पूजा घर की वास्तु ?

poojaghr vastu

 

हर एक घर मे अलग से पूजा का कमरा नहीं हो पता है मगर पूजा का स्थान तो जरूर होता है|

यदि आप इतने भाग्यशाली है कि आप अलग से एक कमरा पूजा के लिए रख सके तो पूजा के कमरे के लिए वास्तु शास्त्र क्या कहता है आइये जाने

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर की दिशा –

  • पूजा का कमरा या पूजा स्थान हमेशा उत्तरी-पूर्व दिशा मे हो तो सब से श्रेष्ट है मगर आप चाहे तो उत्तर की दिशा मे या तो पूर्व की दिशा मे रख सकते है|
  • घर की दो या तीन मंज़िले हो तो बिल्कुल नीचे वाले मंज़िल पर मंदिर स्थापित करे|
  • मंदिर कमरे के अंदर के पूर्व या पश्चिम भाग मे रखे और मूर्ति भी इन्ही जगह पर रखे|
  • ध्यान रहे की मंदिर और मूर्ति दीवार से थोड़ी दूरी पर रखे|
  • पूजा कमरे मे सफेद मार्बल हो तो उचित है और दिवारे भी सफेद, हल्के नीले या हल्के पीले रंग की रखे|
  • दिया जलाए तो दिया का स्टैंड पूर्व दिशा मे रखे|
  • अग्निकुण्ड रखे तो साउथ ईस्ट याने दक्षिण-पूर्वी कोने मे रखे|
  • कमरे के अंदर जाने के दरवाजे पर चौखट बनाए|
  • रसोई घर मे अगर मंदिर लगाए तो उत्तरी पूर्व दिशा मे रखे मंदिर को ताकि आप हमेशा पूजा के समय पूर्व दिशा मे हो|

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा

घर का आकार चौरस या लंबा-चौरस होता है| वास्तु फॉर होम मे आगे जानिए दिशा और कमरे का संबंध:

  • घर के बीच का स्थान ब्रह्मस्थान माना गया है जो हमेशा खुल्ला रहना चाहिए और यहा पर कोई चीज़ ना रखे|
  • लिविंग रूम, टाय्लेट, रोकड़ रखने की जगह, डाइनिंग रूम और पूजा का कमरा हमेशा उत्तर की दिशा मे होते है वास्तु शस्त्र के अनुसार| इस मे पूजा का कमरा, पढ़ाई का कमरा और लिविंग रूम उत्तरी पूर्वा दिशा मे होना उचित है|
  • पूर्व दिशा मे लिविंग रूम, डाइनिंग रूम, पूजा का कमरा, पढ़ाई का कमरा और मेहमानी के लिए बेडरूम होना उचित है|
  • दक्षिण-पूर्वी कोने मे (साउथ -ईस्ट) मे रसोई घर होना चाहिए| यहाँ पर ऑफिस या अविवाहित पुत्र का बेडरूम भी हो सकता है|
  • यही कमरे दक्षिण दिशा मे भी हो सकते है|
  • दक्षिण मे टाय्लेट हो और घर की सीढ़िया हो|
  • दक्षिण-पश्चिम कोने मे मास्टर बेडरूम होना चाहिये या तो तिजोरी वाला कमरा या तो सीढ़ी उपर जाने के लिए|
  • पश्चिम दिशा उचित है टाय्लेट के लिए, डाइनिंग रूम, पूजा रूम, स्टडी रूम या सीढ़ी के लिए|

घर का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तरी पूर्व दिशा मे हो तो यह वास्तु अनुसार है मगर हमेशा यह मुमकिन नहीं है| इस के लिए वास्तु मे उपाय है और यह वास्तु रेमेडीस (vastu remedies) आप ध्यान मे रखे घर के मुख्य द्वार के लिए|

  • घर के मुख्य द्वार सभी दरवाजे से बड़ा हो कद मे यह ध्यान मे रखे|
  • मुख्य द्वार के दो भाग हो तो बेहतर है|
  • दरवाजा अच्छे किसम की लकड़ी से बनवाए|
  • दरवाजा खुले या बंद हो तो कोई आवाज़ ना हो|
  • द्वार पर चौखट आवश्य हो|
  • दरवाजा को अलंकारित करे कोई डिज़ाइन से और आकर्षक बनाए|
  • ज़मीन से थोड़ी उँचाई पर दरवाजा हो इस का ध्यान रखे|
  • किसी भी कोने से एक फुट की दूरी पर घर का मुख्य द्वार बनाए|
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