जानिए स्त्रियों के गुण और विशेषता की एक दिलचस्ब कहानी

quality of ladies

 

दुनिया की सबसे अजीबोगरीब पहेली है स्त्री|  ऐसा माना जाता है कि स्त्री रचना करने  वाला स्वयं भगवान भी स्त्री को नहीं समझ पाये |बड़े – बड़े महात्मा और ऋषिमुनियों की समझ से भी परे है तो आम इंसान तो  है  ही क्या है चीज़  ? आपको यह  जानकर बहुत  ही  हैरानी होगी कि भगवान ने स्त्री रचना बहुत फुर्सत से की है और रचना करते हुए  इतना इतना समय लगने लगा कि देवदूत भी भगवान से सवाल करने लगे कि भगवान आप जिस चीज की रचना कर रहे हैं, उसमें इतना विलंब अर्थात् समय क्यों लग रहा है | जबकि अन्य रचनाओं को आपने चुटकी में ही रच दिया है |

दरअसल स्त्री रचना करते हुए भगवान को 7 दिन पुरे हो चुके थे और स्त्री रचना अभी तक भी पूरी नहीं हुई थी ,यह अधूरी ही थी |

ऐसे में देवदूतों की उत्सुकता और अधिक  बढ़ने लगी कि क्या कारण है जो भगवान को इतना समय लग रहा है और वे भगवान से प्रश्न करने लगेे |

आइये जानते हैं भगवान और देवदूत के बीच स्त्री रचना के समय क्या वार्तालाप हुई-

देवदूत ने भगवान से क्या प्रश्न पूछे और भगवान ने उन दिलचस्प सवालों के क्या जवाब दिये |

दोस्तों, देवदूत ने पूछा – हे भगवान, आपने पूरी सृष्टि की रचना एक मिनट में कर दी,

पर स्त्री को बनाने में इतना मुश्किल क्यों हो रहा है ? इसे बनाने में इतना वक्त क्यों लग रहा है, आखिर कारण क्या है ?

भगवान ने जवाब दिया – देवदूत क्या तुमने इसके गुण देखे हैं,

जिसकी मैं अभी रचना कर रहा हूँ , वह हर हालत में डटी रहती है |

हालात कैसी भी हो अच्छी हो या बुरी हो |हर हाल में चट्टान की तरह स्थिर रहती है |

हमेशा और हर परिस्थिति में खुद को संभाले रहती है |

स्थिति कैसी भी हो, कितनी भी बुरी हो ,सभी को खुश रखती है |

इसमें ऐसा गुण डाला गया है कि यह अपने परिवार व बच्चों को एक समान प्यार करती है |

जिस नारी की रचना में मुझे इतना समय लग रहा है, वह न केवल अपना ध्यान रखती है बल्कि

शारीरिक कमजोरी की अवस्था में भी दिन में 16 घंटे काम करके अपने परिवार को कष्ट नहीं होने देती है |

तो देवदूत तुम ही बताओ जिस स्त्री की रचना कर रहा हूँ उसमें समय लगना चाहिए या नहीं |

देवदूत इसमें इतना प्रेम डाला है कि पुरी दुनिया का प्रेम एक तरफ हो जाय तो भी स्त्री के प्रेम में कभी भी कमी नहीं आयेगी |

देवदूत जब भगवान की ये बातें सुने तो हैरान रह गए और पूछने लगे कि

क्या यह अपने सिर्फ दो हाथों से इतना सब कुछ कर सकती है?

भगवान ने देवदूत का प्रश्न सुनकर जवाब दिया — नि:संदेह देवदूत |यह सबकुछ कर सकती है |

इसी कारण तो यह मेरी अब तक की सभी रचनाओं में से सबसे अद्भुत और आश्चर्यमयी रचना कहलायेगी

यह सब सुनकर देवदूत भगवान की अधुरी रचना को स्पर्श करना चाहा और

इसके पास जाकर हाथों से छुआ और गाल पर हाथ लगाने के बाद भगवान से बोले –

हे प्रभु, यह तो बहुत नाजुक है, यह कैसे इतना सबकुछ कर पायेगी |

भगवान ने हँसकर जवाब दिया – तुम ठीक कह रहे हो देवदूत |

यह बाहर से जितनी नाजुक लग रही है, उतनी यह है नहीं |

इसका शरीर और स्वभाव बाहर से जितना नाजुक है अंदर से उतनी ही मजबूत है |

देवदूत इसे देखकर आपको जितनी हैरानी हो रही है उसी तरह यह सभी के लिए रहस्य ही रहेगा |

मेरी इस रचना में यह सबसे बड़ा गुण है कि जितनी नाजुक यह रचना दिखाई देती है अन्दर से उतनी ही मजबूत है |

इसकी नाजुकता को देखकर कोई गलतफहमी नहीं पालना, क्योंकि परिस्थिति को देखकर यह अपने -आप को आवश्यकतानुसार ढाल लेगी 

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