करें बैठे-बैठे कुछ योगासन, दूर होंगी बीमारियां

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योग का अभ्‍यास नियमित करने से शरीर लचीला और निरोग होता है, ‘आसनशब्‍द का अर्थ है बैठना‘, यहां हम बैठकर करने वाले योग के बारे में जानकारी दे रहे हैं|

 

बैठकर किये जाने वाले योग

योगासन के बहुत प्रकार हैं और इसमें से कई के बारे में आप भी जानते होंगे, लेकिन  हम आपको ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं जिसे बैठकर किया जाता है। योग आसन मेंआसनशब्‍द का अर्थ है बैठना‘, तो इसे बैठकर करना अधिक फायेदमंद होता है। योग का नियमित अभ्‍यास हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से बहुत ही फायदेमंद है, इससे हमारा शरीर लचीला होता है और साथ ही सामान्‍य और खतरनाक बीमारियों से भी बचाव होता है। इनको आप कभी भी और कहीं पर भी आसानी से कर सकते हैं

 

सुखासन

बैठ कर किये जाने वाले योग में सुखासन सबसे आसान योग है। इसे करने के लिए आप जमीन पर पैर मोड़ कर आराम से बैठ जाइए। दोनों हाथों की हथेलियों को खोल कर एक-के ऊपर एक रख दीजिए। इस आसन को करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा कर के बैठें और उसे बिल्‍कुल भी ना मोड़े। सुखासन से पैरों का रक्त संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।

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पद्मासन

संस्कृत भाषा के शब्द पद्म का अर्थ होता है कमल। इसीलिए पद्मासन को कमलासन भी कहा गया हैं। ध्यान मुद्रा के लिए यह आसन सबसे अच्छी मुद्रा है। इस आसन को करने के लिए जमीन पर बैठकर बाएं पैर की एड़ी को दाई जांघ पर इस प्रकार रखते हैं कि एड़ी नाभि के पास आ जाएं। इसके बाद दाएं पांव को उठाकर बाई जांघ पर इस प्रकार रखें कि दोनों एड़ियां नाभि के पास आपस में मिल जाएं। इस मुद्रा का अभ्‍यास करते सम गहरी सांस लेने का अभ्‍यास करें।

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सिद्धासन

इस आसन को करने के लिए दंडासन में बैठकर पैरों को एक दूसरे पर रखें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और अपने हथेलियों को घुटनों पर  रखें। सिद्धासन कूल्‍हों और रीढ की हड्डी की मजबूती प्रदान करता है। इस पूरे आसन के दौरान गहरी सांसें लेना ना भूलें।

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बालासन

बालासन को आप किसी भी समय कर सकते हैं, यहां तक के रात के खाने के बाद भी इस      योग को किया जा सकता है। इस आसन को करने से पेट की चर्बी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके लिए, घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एड़ियों पर हो। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें। कुछ सेकेंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

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भद्रासन

यह आसन टांगों को बल देने के साथ फेफड़ों के लिए भी फायदेमंद होता है। इस आसन को करने के लिए अपने पैरों की एड़ियों को उल्टा कर जमीन पर जांघों में अंतर पर रखें और घुटने टिका कर बैठ जाइए। फिर दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जा कर अपने दोनो हाथों से दोनों पैरों के अंगूठों को पकडें। ताकि बायें पैर का अंगूठा दायें हाथ में आ जाए और दायें पैर का अंगूठा बायें हाथ में आ जाये। इस आसन को करते समय अपनी कमर को सीधा रखें।

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शशकासन

इस आसन को करते समय खरगोश जैसी आकृति बन जाने के कारण इसे शशकासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को सांस भरते हुए ऊपर उठा लें। कंधों को कानों से सटा हुआ महसूस करें। फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, सांस बाहर निकालते हुए हथेलियां को जमीन पर टिका दें। फिर माथे को भी जमीन पर टिका दें। कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर वापस वज्रासन की‍ स्थिति में आ जाये। यह आसन पीठ, कंधे और बाहों खिंचाव में मदद करता है।

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अर्ध-मत्स्येन्द्रासन

अर्ध मत्स्येन्द्रासन रीढ़ को आराम देने के साथ पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है। इस आसन को करने के लिए पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं, रीढ़ तनी हो और दोनों पैर एक-दूसरे से लगे हों। अपने बाएं पैर को मोड़ें और उसकी एड़ी को पुष्टिका के दाएं हिस्से की और ले जाएं। अब दाएं पैर को बाएं पैर की ओर लाएं और बायां हाथ दाएं घुटनों पर और दायां हाथ पीछे ले जाएं। कमर, कन्धों और गर्दन को इस क्रम में दाईं और मोड़ें। लम्बी सांसे लें और छोड़ें।  शुरुआती मुद्रा में आने के लिए सांस छोड़ना जारी रखें।
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