योग क्या है – इसका परिचय, परिभाषा, प्रकार, लाभ और शारीरिक प्रभाव |

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योग / Yoga (कृपया पूरा लेख पढ़ें आप योग को भली प्रकार से समझ सकेंगे) –

योग विश्व इतिहास का सबसे पुराना विज्ञानं है, जिसने व्यक्ति के अध्यात्मिक और शारीरिक क्रिया – कलापों के लिए नए द्वार खोले| योग का जन्म कब हुआ ? यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि इसका अविर्भाव हम ज्ञात नहीं कर सकते | वेदों एवं जैन ग्रंथों में योग का वर्णन मिलता लेकिन फिर भी योग इससे पहले भी विद्यमान था, भले ही वो किसी ग्रंथो में न लिखा गया हो| क्योंकि उस समय ऋषि परम्परा के कारण योग एक ऋषि से दुसरे ऋषि तक मौखिक ही पंहुच जाता होगा| इसलिए योग के आविर्भाव का पता लगाना बहुत मुश्किल है, एवं इसकी कोई आवश्यकता भी नहीं है|

योग क्या है ? What is Yoga in Hindi ?

योग शब्द का शाब्दिक अर्थ – जुड़ना या मिलना होता है लेकिन अगर इसका व्यवहारिक अर्थ देखेंगे तो यह बहुत विस्तृत विज्ञानं स्वरूप है | क्योंकि इसके सभी कर्म और क्रियाएँ मनुष्य को शारीरक और आत्मिक रूप से पूर्ण योगी बनाती है या यूँ कहे की आत्मा से परमात्मा योग में सिद्ध हो सकता है | इतनी प्रसिद्धि के बाद पहली बार 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक बर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी है। भगवद्गीता प्रतिष्ठित ग्रंथ माना जाता है। उसमें योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले और कभी सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, संन्यासयोग, कर्म योग(budhiyog,Sanyas yog, Karmyog)। वेदोत्तर काल में भक्ति योग(Bhakti yog) और हठयोग (Hat yog)नाम भी प्रचलित हो गए हैं पतंजलि योग दर्शन में क्रिया योग शब्द देखने में आता है। पाशुपत योग और माहेश्वर योग जैसे शब्दों के भी प्रसंग मिलते है।

योग यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म ,जैन धर्म और हिंदू धर्म में ध्यान प्रक्रिया से सम्बंधित है। योग शब्द भारत से बौद्ध धर्म के साथ #चीन, #जापान, #तिब्बत, #दक्षिण पूर्व एशिया, #श्री लंका, #बीजिंग, #अमेरिका, #रूस, #फ़्रांस, #ब्रिटेन, #हंगरी, #थायलेंद, #कूय्बा, #अफगानिस्तान, #नुज़िलेंड, और #लंदन में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत्‌ में लोग इससे परिचित हैं।

 

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वैसे योग की परिभाषा विभिन्न ऋषियों ने अलग – अलग दी है लेकिन उनका अर्थ आप देखेंगे तो निश्चित ही समान पाएंगे –

 

योग की विभिन्न परिभाषाएँ / Definition of Yoga

पतंजलि के अनुसार योग की परिभाषा –

“योगश्चित्तवृतिनिरोध:” अर्थात पतंजलि के अनुसार चित की वृतियों का निरोध ही योग कहलाता है |”

योग वशिष्ठ के अनुसार

” संसार सागर से पार होने के उपाय को ही योग कहा जाता है |”

वेदांत के अनुसार

” आत्मा का परमात्मा से पूर्ण रूप से मिलन होना ही योग कहलाता है |”

” शिव और आत्मा के अभेद्य ज्ञान का नाम ही योग है |”

योग की इन सभी परिभाषाओं में शब्द चाहे अलग – अलग हो लेकिन सबके अर्थ एक सामान ही निकलते है | योग की सिद्धि से व्यक्ति शारीरक ही नहीं वरन आत्मिक रूप से भी पूर्ण निरोगी होकर आत्मा से परमात्मा का स्वरुप प्राप्त कर लेता है | व्यक्ति की शारीरक और मानसिक शुद्धि के लिए योग परम आवश्यक युक्ति है |

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योग अपनाने से क्या लाभ प्राप्त होतें है ? / Benefits of Yoga

योग के क्या लाभ है ? ये बता पाना थोडा मुश्किल है , क्योंकि योग के लाभों का पता तो तब ही चलेगा जब आप इसे प्रयोग में लायेंगे | लेकिन फिर भी अगर शाब्दिक अर्थों में देखें तो योग के अनगिनत लाभ है | विभिन्न रोग जैसे –आदि बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है| साथ ही मानसिक विकार एवं अध्यात्मिक क्षेत्र में भी अनगिनत लाभ मिलते है |

आपको योग से होने वाले लाभों को समझने के लिए इसके विभिन्न आसनों का ज्ञान होना भी जरुरी होता है | क्योंकि योग के अनगिनत आसन, मनुष्य को भिन्न – भिन्न प्रकार से लाभ प्रदान करते है | कुछ आसन एसे है जो हृदय विकारों में लाभकारी है एवं वहीं दुसरे आसन किसी अन्य रोग में लाभ प्रदान करते है | योग से होने वाले कुछ लाभों को हमने इन बिन्दुओ में वर्णित किया है –

 

योग के लाभ / फायदे

  • नियमित योग को अपनाने से विभिन्न रोग– जैसे दमा(Asthma), जुकाम, एलर्जी(Alergi), अपच(indigestion), अजीर्ण, हृदय(HEART), स्त्रियों की समस्याएँ(Women problem), आँखों के रोग(Eye problam), गैस(Gas), कैंसर, आँखों की कमजोरी, स्मरण कमजोरी, मोटापा(Obesity), स्नायु रोग, धातु रोग, अशांति, मानसिक विकार एवं एड्स(Aids), जैसी विभिन्न जानलेवा बिमारियों से व्यक्ति को बचाता है |
  • योग का नियमन(Regular) व्यक्ति की उम्र को बढाता है |
  • श्वास के नियंत्रण को शारीरिक रूप से पुष्ट रखता है |
  • ध्यान को अपनाने से मानसिक स्थिरता (
    Mental stability) बढ़ कर सभी प्रकार के मानसिक रोग दूर होते है एवं व्यक्ति अध्यात्म की और बढ़ता है |
  • योग को अपनाने से व्यक्ति में जाग्रति, चेतना एवं सजगता(Consciousness and awareness) बनी रहती है | जिससे व्यक्ति गलत कर्मो की तरफ नहीं बढ़ता |
  • योग को अपनाने से व्यक्ति दृढ संकल्पि, सकारात्मक एवं एकाग्रचित बनता है, यही गुण उसे सबसे अलग और आगे खड़ा करते है |
  • सर्वांगीन स्वास्थ्य की प्राप्ति होती, शरीर हष्ट-पुष्ट बनता है, मन शांत रहता है एवं सभी और से व्यक्ति को सफलता मिलती है |
  • व्यक्ति की नकारात्मक सोच धीरे – धीरे खत्म होने लगती है एवं वह अपने लक्ष्य की और तीव्रता से बढ़ता है |
  • गलत आहार – विहारों का ज्ञान होता है एवं आत्मिक शक्ति प्रबल होती है | जिससे व्यक्ति नशे या गलत व्यसनों को आसानी से अपनी मर्जी से छोड़ देता है |
  • सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोगों या विकारों का शमन होता है |
  • नियमित योगी शांत स्वाभाव एवं निर्मल मन का होता है |
  • पवनमुक्तासन(Pneumonia) समूह एवं शक्ति बंध की क्रियाओं को अपनाने से व्यक्ति का शरीर मजबूत बनता है | पुरे शरीर में फुर्ती आती है, संधियों के जोड़ खुल जाते है एवं सम्पूर्ण शरीर क्रियाशील बनता है जिससे पुरे शरीर के विकारों का हरण होता है|
  • खड़े होकर किये जाने वाले योगासनों से शरीर की मांसपेशियों में मजबूती आती है जिससे गठिया(Arthritis), कम्पवात(Furore), मांसपेशियों(Muscles) का दर्द एवं अकडन, चली जाती है| साथ ही इन योगासनों को अपनाने से घुटने एवं जॉइंट्स की सभी बीमारियों में लाभ मिलता है|
  • वज्रासन समूह के योगासनों को अपनाने से स्त्रियों के मासिक धर्म(Menstrual period), उनके जननांगो के विकारों में लाभ मिलता है | साथ ही वज्रासन में बैठ कर किये जाने वाले असनो से व्यक्ति का प्रजनन अंग एवं पाचन अंगो में सुचारू ढंग से रक्त संचार बढ़ता है, जिससे प्रजनन अंगो के रोग जैसे – हर्निया, धातु – दुर्बलता, शुक्राणुओं की कमी, बवासीर, अंडकोष का बढ़ना, एवं जननांगो की स्थिलता आदि रोगों का हरण होता है |

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इस प्रकार योग के विभिन्न लाभ है लेकिन इनका पता तब ही चलता है जब हम योग को अपनाएं| अब कोई कहे की योग से मुझे इतना फायदा मिला तो क्या आप उसे मानेंगे–शायद मान भी जाएँ लेकिन तर्क–वितर्क(Logic) तो जरुर करेंगे| अत: योग के लाभों को पूर्ण जानने के लिए योग को दैनिक जीवन में लाना जरुरी है, तभी योग से होने वाले वास्तविक(Actual) लाभों के बारे में पहचान पाएंगे |

योग का मानव जीवन पर प्रभाव

अधिकतर हमने योग को सिर्फ व्यायाम, योगासन, प्राणायाम या शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने की क्रिया मात्र समझ रखा है| लेकिन अगर योग को हम गहराई से समझें तो हमें इसके लाभों के साथ–साथ इसके प्रभावों(Effects) का ज्ञान भी होता है| योग आज के विज्ञानं की तरह नहीं है की इसके सिद्धांत बदल सके| यह हमारे हजारों महान ऋषियों की उपलब्धि है जिसे उन्होंने अपने पूर्ण जीवन को समर्पित करके प्राप्त की थी| तभी इसके सिद्धांत भी अकाट्य है, क्योंकि ऋषियों ने निश्चित ही इसके सभी पहलुओं को महसूस किया था और यही कारण है कि आज हमारे सामने योग विद्यमान है|  दरशल योग को हम किसी धर्म विशेष में नहीं बांध सकते, यह तो सभी धर्मो से ऊपर है| धर्म हमें सिर्फ जीना सिखा सकते है, कुछ नियम सिखा सकते या फिर धार्मिकता सिखा सकते है| लेकिन योग हमें उत्तम तरीके से जीवन यापन करने के साथ – साथ आत्मा से परमात्मा(Spirit from Spirit) को उपलब्ध होने का तरीका बताता है जो इस मानव जीवन के लिए परम आवश्यक है |

आज का वातावरण कितना प्रदूषित है ये हम सभी जानते है | वर्तमान समय में प्रदूषित वातावरण, प्रदूषित पर्यावरण, फ़ास्ट – फ़ूड का सेवन, कृत्रिम (रसायनों से निर्मित या सहेजे गए) भोज्य पदार्थ, डिब्बा बंद भोज्य पदार्थ, एवं बदलते परिवेश में मनुष्य को मानसिक विकृत एवं शारीरक रूप से अस्वस्थ बना दिया है | भले ही आधुनिक वैज्ञानिको ने नए – नए उपचार एवं सुविधाएँ खोजी हो लेकिन इनसे होने वाले साइड इफ़ेक्ट से हम सभी भली प्रकार से परिचित है | अत: एसे समय में योग एवं आयुर्वेद ही एक ऐसी विद्या है जिसको अपनाकर हम अपने मानव जीवन को स्वस्थ एवं सार्थक बना सकते है |

 

 

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